मेरे
लाडले कन्हैया मेरे साँवरे कन्हैया
मेरी
ज़िन्दगी तो है बस तेरे आसरे कन्हैया
तेरी याद जब सताये तो बता किसे पुकारूँ
तू ही तू बसा है मन में मेरे बावरे कन्हैया
तेरी छब को जो निहारे उसे कुछ भी ना सुहाए
तेरा जादू है ही ऐसा कोई क्या करे कन्हैया
जो हमारे दरमियाँ था वो ही सब लिखा है इसमें
कभी मेरे मन की पाती भी तो बाँच रे कन्हैया
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