दुनिया में मशहूर है, जिन अँखियों का नूर ।
हम को भी उनका नशा, हो ही गया हुज़ूर ॥
प्रीत-चुनरिया में कहाँ, लगते हैं पैबन्द ।
हम सच्चे दिलदार हैं, क्यों खाएँ सौगन्ध ॥
क्यों तेरी सौगन्ध खाएँ साँवरे ।
चीर कर दिल क्यों दिखाएँ साँवरे ।
तेरी मरजी मान या मत मान रे ॥