झूठा भी है लेकिन, सच्चा दिलवाला है ।
कोई चोर अगर ऐसा देखा हो तो बतलाना ॥
कहीं नजर न लग जाये, मेरा श्याम है मस्ताना ॥
घर में घुस कर फिर वो, नवनीत चुराता है ।
नवनीत चुरा कर फिर अँखियों को मटकाना ॥
कहीं नजर न लग जाये, मेरा श्याम है मस्ताना ॥
कहीं गया नहीं कान्हा, ब्रज में ही रहता है ।
पग-पग पर गूँज रहा उस का ही अफसाना ॥
कहीं नजर न लग जाये, मेरा श्याम है मस्ताना ॥
यमुना के तट नटखट मो सों अटकत,
झटकत मटकत गैल अटकावै है ।
मैं जो कहों गुप-चुप माखन तू खाय लै तौ,
माखन न खावै ग्वाल-बाल’न बुलावै है ।
ग्वाल-बाल संग लावै गगरी छुड़ावै,
खूब खावै औ खवाबै, ब्रज-रज में मिलावै है ।
तीन लोक स्वामी, हो’गौ नामी औ गिरामी,
मैं तौ चोर ही कहोंगी - मेरौ माखन चुरावै है ॥
लल्ला बन जाय और हल्ला हू मचावै खूब,
खेलत-खेलत चौका बीच घुस आवै है ।
डाँट औ डपट मो सों घर के करावै काम,
ननद बनै तौ कबू सास बन जावै है ।
बन कें देवर मोहि दिखावै तेवर,
ढीठ बन कें ससुर मो पै रौब हू जमावै है ।
ग्वाला बन गैया दुहै, गैया बन दूध देय,
दूध बन मेरे घट भीतर समावै है ॥
कोई चोर आता है तो कपड़े चुराये और,
कोई-कोई चोर अन्न-धन को चुराता है ।
जर को चुराये, कोई जमीन चुराये, कोई,
हक को चुरा के बड़ा कष्ट पहुँचाता है ।
दुनिया ने देखे कई तरह के चोर, किन्तु,
चोर ये नवीन मेरे मन को लुभाता है ।
माखन चुराने के बहाने आये श्याम,
मेरे मन को चुरा के मालामाल कर जाता है।।
No comments:
Post a Comment