भजन कीर्तन और कवित्त - कहीं नजर न लग जाये, मेरा श्याम है मस्ताना

 क्या रूप सलोना है जग जिसका है है दीवाना ।
कहीं नजर  लग जायेमेरा श्याम है मस्ताना ॥
 
है चोर बड़ा छलियाकपटी है काला है ।
झूठा भी है लेकिनसच्चा दिलवाला है ।
कोई चोर अगर ऐसा देखा हो तो बतलाना ॥
कहीं नजर  लग जायेमेरा श्याम है मस्ताना ॥
 
चुपके से आता हैघर में घुस जाता है ।
घर में घुस कर फिर वोनवनीत चुराता है ।
नवनीत चुरा कर फिर अँखियों को मटकाना ॥
कहीं नजर  लग जायेमेरा श्याम है मस्ताना ॥
 
कुछ भी मत बोल उद्धवमन मेरा कहता है ।
कहीं गया नहीं कान्हाब्रज में ही रहता है ।
पग-पग पर गूँज रहा उस का ही अफसाना ॥
कहीं नजर  लग जायेमेरा श्याम है मस्ताना ॥



यमुना के तट नटखट मो सों अटकत,

झटकत मटकत गैल अटकावै है ।

 

मैं जो कहों गुप-चुप माखन तू खाय लै तौ,

माखन खावै ग्वाल-बाल बुलावै है ।

 

ग्वाल-बाल संग लावै गगरी छुड़ावै,

खूब खावै खवाबै, ब्रज-रज में मिलावै है ।

 

तीन लोक स्वामी, होगौ नामी गिरामी,

मैं तौ चोर ही कहोंगी - मेरौ माखन चुरावै है ॥

 

 

 

लल्ला बन जाय और हल्ला हू मचावै खूब,

खेलत-खेलत चौका बीच घुस आवै है ।

 

डाँट डपट मो सों घर के करावै काम,

ननद बनै तौ कबू सास बन जावै है ।

 

बन कें देवर मोहि दिखावै तेवर,

ढीठ बन कें ससुर मो पै रौब हू जमावै है ।

 

ग्वाला बन गैया दुहै, गैया बन दूध देय,

दूध बन मेरे घट भीतर समावै है ॥

 

 

 

कोई चोर आता है तो कपड़े चुराये और,

कोई-कोई चोर अन्न-धन को चुराता है ।

 

जर को चुराये, कोई जमीन चुराये, कोई,

हक को चुरा के बड़ा कष्ट पहुँचाता है ।

 

दुनिया ने देखे कई तरह के चोर, किन्तु,

चोर ये नवीन मेरे मन को लुभाता है ।

 

माखन चुराने के बहाने आये श्याम,

मेरे मन को चुरा के मालामाल कर जाता है।।

No comments:

Post a Comment