दुनिया में मशहूर है, जिन अँखियों का नूर ।
हम को भी उनका नशा, हो ही गया हुज़ूर ॥
प्रीत-चुनरिया में कहाँ, लगते हैं पैबन्द ।
हम सच्चे दिलदार हैं, क्यों खाएँ सौगन्ध ॥
क्यों तेरी सौगन्ध खाएँ साँवरे ।
चीर कर दिल क्यों दिखाएँ साँवरे ।
तेरी मरजी मान या मत मान रे ॥
क्यों तेरे नखरे उठाएँ साँवरे ।
क्यो तुझे सर पर चढाएँ साँवरे ।
तेरी मरजी मान या मत मान रे ॥
हाँ हमें तुझ से मुहब्बत हो गयी ।
तेरे बिन बीमार हालत हो गयी ।
हम हकीकत क्यों छुपाएँ साँवरे ।
किस लिये नजरें चुराएँ साँवरे ।
तेरी मरजी मान या मत मान रे ॥
तू भी तो रस्मेमुहब्बत को निभा ।
बिन बुलाए आ हमें मिलने बुला ।
हम ही क्यों हर दम बुलाएँ साँवरे ।
क्यों तुझे सर पर चढाएँ साँवरे ।
तेरी मरजी मान या मत मान रे ॥
हम सच्चे दिलदार हैं, क्यों खाएँ सौगन्ध ॥
चीर कर दिल क्यों दिखाएँ साँवरे ।
तेरी मरजी मान या मत मान रे ॥
क्यों तेरे नखरे उठाएँ साँवरे ।
क्यो तुझे सर पर चढाएँ साँवरे ।
तेरी मरजी मान या मत मान रे ॥
तेरे बिन बीमार हालत हो गयी ।
हम हकीकत क्यों छुपाएँ साँवरे ।
किस लिये नजरें चुराएँ साँवरे ।
तेरी मरजी मान या मत मान रे ॥
बिन बुलाए आ हमें मिलने बुला ।
हम ही क्यों हर दम बुलाएँ साँवरे ।
क्यों तुझे सर पर चढाएँ साँवरे ।
तेरी मरजी मान या मत मान रे ॥
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