भजन कीर्तन - क्यों तेरी सौगन्ध खाएँ साँवरे

 दुनिया में मशहूर हैजिन अँखियों का नूर ।
हम को भी उनका नशाहो ही गया हुज़ूर ॥
 
प्रीत-चुनरिया में कहाँलगते हैं पैबन्द ।
हम सच्चे दिलदार हैंक्यों खाएँ सौगन्ध ॥
 
क्यों तेरी सौगन्ध खाएँ साँवरे ।
चीर कर दिल क्यों दिखाएँ साँवरे ।
तेरी मरजी मान या मत मान रे ॥
क्यों तेरे नखरे उठाएँ साँवरे ।
क्यो तुझे सर पर चढाएँ साँवरे ।
तेरी मरजी मान या मत मान रे ॥
 
हाँ हमें तुझ से मुहब्बत हो गयी ।
तेरे बिन बीमार हालत हो गयी ।
हम हकीकत क्यों छुपाएँ साँवरे 
किस लिये नजरें चुराएँ साँवरे ।
तेरी मरजी मान या मत मान रे ॥
 
तू भी तो रस्मेमुहब्बत को निभा ।
बिन बुलाए  हमें मिलने बुला ।
हम ही क्यों हर दम बुलाएँ साँवरे ।
क्यों तुझे सर पर चढाएँ साँवरे ।
तेरी मरजी मान या मत मान रे ॥

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