जिसके मस्तक ब्रज धूलि लगी
वो आना जाना क्या जाने
जिसके मन में घनश्याम बसें
वो और ठिकाना क्या जाने
मथुरा वृन्दावन की गलियाँ
माखन और मिसरी की डलियाँ
जिसने इनकी महिमा जानी
वो और फसाना क्या जाने
कालिन्दी कूल कदम्ब तले
मोहन की मुरलिया को सुनकर
जिसके मन में मिरदंग बजे
वो और तराना क्या जाने
आँखों में कान्हा की मूरत
होठों पर राधे राधे हो
बस इतना जिसको मिल जाये
वो और खजाना क्या जाने
हम नित्य नवीन खता करते
तुम नित्य नवीन कृपा करते
तुम जिसको बरी कर देते हो
वो सजा जुर्माना क्या जाने
जिसके मन में घनश्याम बसें
वो और ठिकाना क्या जाने
मथुरा वृन्दावन की गलियाँ
माखन और मिसरी की डलियाँ
जिसने इनकी महिमा जानी
वो और फसाना क्या जाने
कालिन्दी कूल कदम्ब तले
मोहन की मुरलिया को सुनकर
जिसके मन में मिरदंग बजे
वो और तराना क्या जाने
आँखों में कान्हा की मूरत
होठों पर राधे राधे हो
बस इतना जिसको मिल जाये
वो और खजाना क्या जाने
हम नित्य नवीन खता करते
तुम नित्य नवीन कृपा करते
तुम जिसको बरी कर देते हो
वो सजा जुर्माना क्या जाने
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