भले ही चोर है लेकिन सखा सभी का है ।
अरे हुजूर उसे पहचानो वो कन्हैया है ।।
हरेक तत्व में अस्तित्व उसका है लेकिन ।
वो कुंज-गलियों में रहना पसन्द करता है ।।
उसे न ढूँढो घरोंदों में कन्दराओं में ।
वो तो हृदय से हृदय की उड़ान भरता है ।।
विराट रूप है उस का मगर है सच ये भी ।
कभी-कभी वो भी दुनिया से हार जाता है ।।
हज़ारों साल हुये उसे को ज़ख़्म खाये हुए ।
मगर हमारे लिए तो वही कन्हैया है ।।
वो कुंज-गलियों में रहना पसन्द करता है ।।
वो तो हृदय से हृदय की उड़ान भरता है ।।
कभी-कभी वो भी दुनिया से हार जाता है ।।
मगर हमारे लिए तो वही कन्हैया है ।।
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