कंकर-कंकर, अक्षर-अक्षर, हर नाम तुम्हारा नाम
कन्हैया बारम्बार प्रणाम
कन्हैया बारम्बार प्रणाम
कठिन-समय में आते हो और सच्ची राह दिखाते हो
हम से जो हो पाए न सम्भव चुटकी में कर जाते हो
प्रीत-पन्थ पर चलने वाले गोवर्धनधारी घनश्याम
शरणागत की लाज बचाकर कृपासिन्धु कहलाते हो
गिरने से पहले ही भगत को लेते हो तुम थाम
कन्हैया बारम्बार प्रणाम कन्हैया बारम्बार प्रणाम
तुम जागो तो दुनिया जागे, सोते ही जग सो जाए
तुम हाजिर तो सबकुछ हाज़िर, नहीं तो सब कुछ खो जाए
कण-कण में तुम रचे-बसे हो, जन-जन के मन के रंजन
छोड़ तुम्हारी नगरी कोई किसकी नगरी को जाए
तुम्हीं परिश्रम, तुम्हीं प्रतीक्षा, तुम ही हो परिणाम
कन्हैया बारम्बार प्रणाम कन्हैया बारम्बार प्रणाम
सकल सृष्टि जोगी की माला, धरती तो इक दाना है
गीता की गहरी बातों को दुनिया भर ने माना है
बिना तुम्हारी कृपा कृपालु, अच्छे-अच्छे भटके हैं
इसीलिये गुरुमन्तर जपकर भवसागर तर जाना है
सावधान हो कर ही मन को, मिलता है विश्राम
बारम्बार प्रणाम कन्हैया बारम्बार प्रणाम
कठिन-समय में आते हो और सच्ची राह दिखाते हो
हम से जो हो पाए न सम्भव चुटकी में कर जाते हो
प्रीत-पन्थ पर चलने वाले गोवर्धनधारी घनश्याम
शरणागत की लाज बचाकर कृपासिन्धु कहलाते हो
गिरने से पहले ही भगत को लेते हो तुम थाम
कन्हैया बारम्बार प्रणाम कन्हैया बारम्बार प्रणाम
तुम जागो तो दुनिया जागे, सोते ही जग सो जाए
तुम हाजिर तो सबकुछ हाज़िर, नहीं तो सब कुछ खो जाए
कण-कण में तुम रचे-बसे हो, जन-जन के मन के रंजन
छोड़ तुम्हारी नगरी कोई किसकी नगरी को जाए
तुम्हीं परिश्रम, तुम्हीं प्रतीक्षा, तुम ही हो परिणाम
कन्हैया बारम्बार प्रणाम कन्हैया बारम्बार प्रणाम
सकल सृष्टि जोगी की माला, धरती तो इक दाना है
गीता की गहरी बातों को दुनिया भर ने माना है
बिना तुम्हारी कृपा कृपालु, अच्छे-अच्छे भटके हैं
इसीलिये गुरुमन्तर जपकर भवसागर तर जाना है
सावधान हो कर ही मन को, मिलता है विश्राम
बारम्बार प्रणाम कन्हैया बारम्बार प्रणाम
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