भजन कीर्तन - उन्हीं के भक्त हैं उनके गुणों का गान करते हैं

 उन्हीं के भक्त हैं उनके गुणों का गान करते हैं
उन्हीं के गीत गाते हैं उन्हीं का ध्यान करते हैं
 
बिना सोचे बिना समझे भलाई कौन करता है
बिना सोचे बिना समझे भला भगवान करते हैं
 
यही शबरी बताती है यही केवट बताता है
जगत उपकार करता है प्रभू सम्मान करते हैं
 
प्रभू श्री राम के जैसा कोई दानी नहीं देखा
दुखों के ढेर पर बैठे सुखों का दान करते हैं
 
भले ही सूर्यवंशी हैं मगर मुख चन्द्रमा सा है
वे चन्दा हैं पपीहे हम सुधारस पान करते हैं

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