साँवरे सलोने नन्दलाल तेरी गाय हैं ।
हम तो सीधीसादी हे गोपाल
तेरी गाय हैं ।।
एक बार तो गोपाल बाँसुरी
सुना हमें ।
धुन सुना के कर हमें निहाल तेरी गाय हैं ।।
एक बार तो गोपाल माधुरी चखा
हमें ।
रस चखा के कर हमें निहाल तेरी गाय हैं ।।
एक बार तो गोपाल रास में
बुला हमें ।
और नचा के कर हमें निहाल तेरी गाय हैं ।।
नित्य ही नवीन तू है नित्य
ही नवीन हम ।
नित्य ही नवीन कर कमाल तेरी गाय हैं ।।
धुन सुना के कर हमें निहाल तेरी गाय हैं ।।
रस चखा के कर हमें निहाल तेरी गाय हैं ।।
और नचा के कर हमें निहाल तेरी गाय हैं ।।
नित्य ही नवीन कर कमाल तेरी गाय हैं ।।
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