भजन कीर्तन - साँवरे सलोने नन्दलाल तेरी गाय हैं

 साँवरे सलोने नन्दलाल तेरी गाय हैं ।
हम तो सीधीसादी हे गोपाल तेरी गाय हैं ।।
 
एक बार तो गोपाल बाँसुरी सुना हमें ।
धुन सुना के कर हमें निहाल तेरी गाय हैं ।।
 
एक बार तो गोपाल माधुरी चखा हमें ।
रस चखा के कर हमें निहाल तेरी गाय हैं ।।
 
एक बार तो गोपाल रास में बुला हमें ।
और नचा के कर हमें निहाल तेरी गाय हैं ।।
 
नित्य ही नवीन तू है नित्य ही नवीन हम ।
नित्य ही नवीन कर कमाल तेरी गाय हैं ।।

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