भजन कीर्तन - बड़ी मिठास भरे रस को पी के आया हूँ

 बड़ी मिठास भरे रस को पी के आया हूँ ।
नज़र में भर के दरस लाडली के आया हूँ ।।
 
गया था मैं भी वहाँ ज्ञान का वमन करने ।
मुहब्बतों के समझ कर सलीक़े आया हूँ ॥
 
वो एक पल जो परम-ध्यान में बिताया था ।
उस एक पल में कई जन्म जी के आया हूँ ।।
 
सभी के सामने अब सर नहीं झुकाऊँगा ।
नवा के शीश भवन में लली के आया हूँ ।।
 
दवा तो जिस्म के रोगों को ठीक करती है ।
लिहाज़ा रूह पै लगवा के टीके आया हूँ ।।
 
नये उजाले धुएँ भर रहे थे आँखों में ।
सो मैं जला के दिये शुद्ध घी के आया हूँ ।।

No comments:

Post a Comment