नैंक बेसुध से हैं नैंक बेहाल हैं
लाडले लाडली लाज सों लाल हैं
ऐसौ सुन्दर दरस हीय भींजै
हरस
ज्यों सुमन पै सुमन गाल पै गाल हैं
एकटक या दरस कों लखों सौ बरस
दोऊ ग्रीवा सदृश दोऊ गलमाल हैं
एक अवरोह तौ दूजौ आरोह पै
खूब आलाप हैं खूब सुरताल हैं
देख कें जो मगन वे ही साँचे रसिक
बादबाकी तौ जीवन के जंजाल हैं
ज्यों सुमन पै सुमन गाल पै गाल हैं
एकटक या दरस कों लखों सौ बरस
दोऊ ग्रीवा सदृश दोऊ गलमाल हैं
खूब आलाप हैं खूब सुरताल हैं
देख कें जो मगन वे ही साँचे रसिक
बादबाकी तौ जीवन के जंजाल हैं
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