भैया हम तो ब्रजवासी हैं

 हाकिम या सुल्तान नहीं भैया हम तो ब्रजवासी हैं
और कोई पहिचान नहीं भैया हम तो ब्रजवासी हैं
 
“ठाकुर हमरे रमणबिहारी हम हैं रमणबिहारी के”
हमें और कुछ ज्ञान नहीं भैया हम तो ब्रजवासी हैं
 
कोई अश्क बहाता है तो हम भी रोने लगते हैं
पत्थरदिल इनसान नहीं भैया हम तो ब्रजवासी हैं
 
प्रेम किया है प्रेम करेंगे प्रेम की जोत जलायेंगे
नफरत की दूकान नहीं भैया हम तो ब्रजवासी हैं
 
दौलत को परनाम करें और प्रेम के हाथों बिक जायें
बाजारू सामान नहीं भैया हम तो ब्रजवासी हैं
 
रसिया के प्रेमी हैं सो रस में डूबे रहते हैं पर
अय्याश और हैवान नहीं भैया हम तो ब्रजवासी हैं

No comments:

Post a Comment