ऐसौ भव्य-दिव्य और ऐसौ ओजस्वी स्वरूप,
जाकी प्रभुता कौ कन-कन पै इजारौ है ।
जाके अंग-अंग सूर्य, चन्द्रमा, अकास-गंग,
जाकी ज्योत्सना कौ ठौर-ठौर उजियारौ है ।
नित्य ही नवीन रश्मि-पुंज’न कों प्रगटावै,
जाके हौल सों हलाल तिमिर बिचारौ है ।
ऐसे प्रभावन्त कों मैं कैसें कह देंहु कारौ,
मेरौ लाल कारौ नाँहि, स्वर्ण-वर्ण वारौ है ।।
No comments:
Post a Comment