मोहिनी बिहारी जू के छन्द

 मोहिनी बिहारी जू की मोहिनिया मूरत के
दरस करों मैं गुरुदेव के बरन में
 
जीवन मरण सुख दुख हानि और लाभ
मेरौ सरबस गुरुदेव के कर’न में
 
नित्य ही नवीन भीनी भीनी खसबू’न संग
झीनी झीनी झर लगै नाम सुमरन में
 
जाने अनजाने जानें कौंन से फले हैं पुण्य
ठौर मिली मोय गुरुदेव चरन’न में
 
 
 
मोहिनी बिहारी जू की नासिका औ कान’न में
लटकी रहें वे लटकन बन जाओं मैं
 
साज औ सिंगार कर रूप कों निहारें जा में
ऐ हो विधिना वौ दरपन बन जाओं मैं
 
नित्य ही नवीन हास परिहास कौ विलास
नूपुर’न वारी छन छन बन जाओं मैं
 
करुणानिधान मो पै इतनी महर कीजै
सब तज, ब्रज-रज-कन बन जाओं मैं

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