नैन’न कों यों लगै कि नैन मटकाय रह्यौ
कान’न कों यों लगै कि
बाँसुरी बजावै है
नासिका कों यों लगै कि फुलवा
सुँघाय रह्यौ
रसना कों यों लगै कि माखन चखावै है
नित्य ही नवीन वाके हाव और
भाव’न सों
हियरा कों लाख लगै जियरा जरावै है
चित्त तौ चकित्त भयौ अविराम
आठौ याम
राधेश्याम राधेश्याम राधेश्याम गावै है
रसना कों यों लगै कि माखन चखावै है
हियरा कों लाख लगै जियरा जरावै है
राधेश्याम राधेश्याम राधेश्याम गावै है
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