ऐसा अद्भुत नजारा विश्व में कहीं भी नहीं,
जहाँ जगदीश स्वयं जाप करे राधे-राधे ।
पूरब या पच्छिम हो उत्तर या दक्खिन हो,
जिसको भी देखो वो ही नाम रटे राधे-राधे ।
मानव के मानस के मोद भरे मन्दिर में,
नित्य ही नवीन भक्तिभाव भरे राधे-राधे ।
ब्रजरज रेणुका का करिश्मा ही ऐसा है कि,
पूरब या पच्छिम हो उत्तर या दक्खिन हो,
मानव के मानस के मोद भरे मन्दिर में,
ब्रजरज रेणुका का करिश्मा ही ऐसा है कि,
पाँव धरते ही मुख बोल पड़े राधे-राधे ।।
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