छन्द - श्री मद्भगवद्गीता

 हर तत्व पै विमर्श हर प्रश्न का उत्तर
जिसने बता के बुद्धिजीवियों को जीता है ।
 
कण-कण में शिव के दरस कराने वाला
जिसके समक्ष कुछ भरा है न रीता है ।
 
नित्य ही नवीन विष नित्य ही नवीनामृत
रुच रुच के समान भाव से जो पीता है ।
 
उसके होठों से झरा अर्जुन ने पान किया
सबसे निराला ऐसा अधरामृत गीता है ।।

 
अठारह अध्यायों में रीति से रचाया हुआ,
विश्व हितकारी श्रेष्ठ सृजनामृत गीता है ।
 
प्रश्न प्रति प्रश्न पुनि उत्तर, प्रत्युत्तर में,
लीलामृत, पंचामृत, चरणामृत गीता है ।
 
नित्य ही नवीन युगधर्म अनुकूल मूल
वचन विवेचना का वचनामृत गीता है ।
 
कृष्ण अधरों से झरा अर्जुन ने पान किया,

सबसे निराला ऐसा अधरामृत गीता है ॥

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