हर तत्व पै विमर्श हर प्रश्न का उत्तर
जिसने बता के बुद्धिजीवियों
को जीता है ।
कण-कण में शिव के दरस कराने वाला
जिसके समक्ष कुछ भरा है न रीता है ।
नित्य ही नवीन विष नित्य ही नवीनामृत
रुच रुच के समान भाव से जो पीता है ।
उसके होठों से झरा अर्जुन ने पान किया
सबसे निराला ऐसा अधरामृत गीता है ।।
अठारह अध्यायों में रीति से रचाया हुआ,
विश्व हितकारी श्रेष्ठ
सृजनामृत गीता है ।
प्रश्न प्रति प्रश्न पुनि उत्तर, प्रत्युत्तर में,
लीलामृत, पंचामृत, चरणामृत गीता है ।
नित्य ही नवीन युगधर्म अनुकूल मूल
वचन विवेचना का वचनामृत गीता है ।
कृष्ण अधरों से झरा अर्जुन ने पान किया,
कण-कण में शिव के दरस कराने वाला
जिसके समक्ष कुछ भरा है न रीता है ।
नित्य ही नवीन विष नित्य ही नवीनामृत
रुच रुच के समान भाव से जो पीता है ।
उसके होठों से झरा अर्जुन ने पान किया
सबसे निराला ऐसा अधरामृत गीता है ।।
अठारह अध्यायों में रीति से रचाया हुआ,
प्रश्न प्रति प्रश्न पुनि उत्तर, प्रत्युत्तर में,
नित्य ही नवीन युगधर्म अनुकूल मूल
वचन विवेचना का वचनामृत गीता है ।
कृष्ण अधरों से झरा अर्जुन ने पान किया,
सबसे निराला ऐसा अधरामृत
गीता है ॥
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