रतनारी आँखों वाले भूतनाथ, भोलानाथ,
कज्जल अमावस को पूर्णिमा
बनाइये ।
परम-उदारी, सदाचारी, जटा-जूट
धारी,
ज्ञानी, ध्यानियों को प्रेम-संहिता पढ़ाइये ।
नित्य ही नवीन वेषधारी, त्रिपुरारी, शम्भु,
करुणा-निधान कृपादृष्टि सरसाइये ।
हे विघ्नहर्ता-तात विघ्नों का कर विनाश,
एकमेव विश्व-मित्र, मित्रता निभाइये ।।
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