छन्द - महादेव

 रतनारी आँखों वाले भूतनाथभोलानाथ,
कज्जल अमावस को पूर्णिमा बनाइये ।
 
परम-उदारीसदाचारीजटा-जूट धारी,
ज्ञानीध्यानियों को प्रेम-संहिता पढ़ाइये ।
 
नित्य ही नवीन वेषधारीत्रिपुरारीशम्भु,
करुणा-निधान कृपादृष्टि सरसाइये 
 
हे विघ्नहर्ता-तात विघ्नों का कर विनाश,
एकमेव विश्व-मित्रमित्रता निभाइये ।।

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