भजन कीर्तन - कृष्ण जन्माष्टमी की भेंट

 

दोहा 1

 

कृष्ण जन्म के पर्व पर, यमुना ललित ललाम ।

राधे से मिलने चलीं, श्री बरसाने धाम ।।

 

दोहा 2

 

सब सब के आधीन हैं, फिर भी भेद महीन ।

कोई जल बिनु मीन है, कोई जल, बिनु मीन ।।

 

दोहा 3

 

मनमीतों से कब छुपा, मनमीतों का हाल ।

राधे को मालूम है, सबके हैं नँदलाल ।।

 

मुखड़ा - यमुना जी

 

राधे से ज़रा कह दो यमुना सखि आई है

प्राकट्य महोत्सव की राधे जु बधाई है

 

मुखड़ा - राधे जू

 

यह पुण्य पुनीत घड़ी कितनी सुखदाई है

मेरे प्रीतम की प्यारी तुमको भी बधाई है

 

अन्तरा - यमुना जी

 

मैं ने तो सितमगर के चरणों को छुआ भर है

गोविन्द की गरिमा को महसूस किया भर है

अधरों पै धरी मुरली राधे तुमने बजाई है

प्राकट्य महोत्सव की राधे जु बधाई है

 

अन्तरा - राधे जू

 

मैं गोरी हूँ तो क्या तुम श्याम की श्यामा हो

जनमों की मैं अभिलाषी तुम पूरनकामा हो

जो रीति है रसिकों की वो तो तुमने निभाई है

मेरे प्रीतम की प्यारी तुमको भी बधाई है

 

भक्तों की विनती

 

वृषभानु सुता की जय यमुना मैया की जय

जय जय जय नित्य नवीन गुरुदेव कृपा की जय

जय जय उस छवि की जो नयनों में समाई है

इस प्रीत सगाई की सारे जग को बधाई है

 

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