रसिक शिरोमणि स्वामी श्री हरिदास जी

 रसिक-शिरोमणि-धाम के, साँचे-सेवादार ।
पल-पल सिमरुँ आप को, नमन करूँ सरकार ।।
 
गो-रस-रसिक-प्रिया-रसिक, वृन्दा-विपिन-विहार ।
ब्रज-रज-कण-मणि के धनी, कृपा करो सरकार ।।
 
मूढ़ समझ सकते नहीं, गूढ़ तत्व का सार ।
आप अगम हैं, आपकी, लीला अपरम्पार ।।
 
प्रीत भरे पीयूष के, पान करावन हार ।
मम हिय घट में भी भरो, अमरित रस की धार ।।
 
कृपानाथ निज दास की, अरज करो स्वीकार ।
मन-भ्रमना को भेद कर, कर दो बेड़ा पार ।।

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