छन्द - मोर पखा वारौ मोहि प्राण’न सों प्यारौ है

 पाँय’न में पैजनियाँ, हाथ’न में बाँसुरिया,
कामरिया कटि, सीस मुकुट ढरारौ है।
 
गल बैजयंती माल, केसर की खौर भाल,
आगें पाछें ग्वाल-बाल, पीताम्बर धारौ है।
 
नित्य ही नवीन लीला करिवे में सिद्धहस्त,
मस्त-मस्त बात करै हिय कौ सहारौ है।
 
ऐ री बीर और केतौ खुल कें बताओं तोहि,
मोर पखा वारौ मोहि प्राण’न सों प्यारौ है।।

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