साँवरौ-सलौनों नन्द-जसुधा कौ प्राणप्यारौ,
नैन’न कौ तारौ मन्द-मन्द
मुसकावै है ।
सृष्टि कौ रचैया बलभद्र जू
कौ भैया श्याम,
भक्त’न के भक्तिभाव देखि कें सिहावै है ।
नित्य ही नवीन लीला करिवे
वारौ गुपाल,
शोभा अभिराम कामदेव कों
लजावै है ।
यमुना के कूल’न पै, फूल’न के बँगला में,
फूल’न सी देह वारौ फूल्यौ न
समावै है ।।
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